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प्रशासन का मानवीय चेहरा: जब कलेक्टर खुद पहुंचे दिव्यांगों की चौखट तक

सागर। शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाने का सबसे बेहतरीन तरीका संवेदनशीलता है। सागर कलेक्टर संदीप जी आर ने केसली विकासखंड में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया, जिसने न केवल प्रशासनिक ढांचे की गरिमा बढ़ाई, बल्कि आम जनमानस का दिल भी जीत लिया। जनसुनवाई के दौरान अमूमन यह देखा जाता है कि फरियादी अपनी अर्जियां लेकर अधिकारियों की टेबल तक मशक्कत करके पहुंचते हैं। लेकिन केसली में नजारा इसके उलट था। जैसे ही कलेक्टर संदीप जी आर की नजर पंडाल में बैठे उन दिव्यांगजनों पर पड़ी जो चलने-फिरने में असमर्थ थे, उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी। वे खुद चलकर उनके पास पहुंचे और उनके बीच बैठकर एक अभिभावक की तरह उनकी बातें सुनीं।कलेक्टर ने न केवल उनकी समस्याओं को सुना, बल्कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके पर ही तलब किया। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि दफ्तरों के चक्कर बंद हों, दिव्यांगों और बुजुर्गों के आवेदन फाइलों में नहीं दबने चाहिए।  पेंशन, राशन कार्ड और दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों का निराकरण निर्धारित समय सीमा के भीतर हो। शासन की योजनाओं का लाभ देने के साथ-साथ उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर की इस आत्मीयता को देखकर वहां मौजूद एक वृद्ध दिव्यांग ने कहा साहब खुद हमारे पास चलकर आए और परेशानी पूछी ऐसा लगा जैसे कोई अपना आया हो।कलेक्टर संदीप जी आर की यह अभिनव पहल यह संदेश देती है कि कलेक्टर सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का एक माध्यम है। जब सर्वोच्च अधिकारी खुद जमीन पर उतरता है, तो पूरा प्रशासनिक अमला सक्रिय हो जाता है। सागर जिले में शुरू हुई यह जमीनी जनसुनवाई अब सुशासन की नई मिसाल बन रही है।

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