टीकमगढ़ । बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राचीन तालाबों के शहर टीकमगढ़ में भू-माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के मध्य स्थित राजशाही काल की अमूल्य धरोहर 'सैल सागर तालाब' आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। भू-माफियाओं द्वारा तालाब की बंधानों को समतल कर सार्वजनिक भूमि को ₹100 के स्टाम्प पेपर पर अवैध रूप से बेचने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस गंभीर विषय को लेकर हिंदू युवा वाहिनी ने कार्यकर्ताओं और नगरवासियों के साथ मिलकर माननीय कलेक्टर एवं दण्डाधिकारी सहित मुख्य नगरपालिका अधिकारी टीकमगढ़ को शिकायती ज्ञापन सौंपा है।
सौंपे गए ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि भू-माफियाओं द्वारा एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत तालाब की ऐतिहासिक बंधानों को नष्ट किया जा रहा है। नगर के नैसर्गिक सौंदर्य और जलसंकट निवारण के मुख्य स्रोत रहे इस तालाब की आधी से अधिक भूमि को अवैध रूप से तृतीय पक्षों को बेचा जा चुका है।
प्राचीन मंदिरों पर अतिक्रमण से धार्मिक भावनाएं आहत
शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि मिश्रा तिराहे और सैल सागर चौराहे की बंधान पर स्थित प्राचीन हिंदू मंदिरों पर भी कुछ असामाजिक तत्वों ने अनधिकृत रूप से कब्जा कर लिया है। वहाँ तोड़-फोड़ कर अवैध निवास बना लिए गए हैं। जिसको देखकर हर हिंदू की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, इस अतिक्रमण के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और क्षेत्र में सामाजिक शांति भंग होने की आशंका गहरा गई है।
2019 से प्रशासन की निष्क्रियता से, प्रशासन की मंशा पर सवाल
संगठन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संबंध में 24 दिसंबर 2019 को भी एक शिकायती आवेदन (क्रमांक HYV/tkg/055) दिया गया था। शुरुआत में प्रशासन ने दिखावे के लिए कुछ नोटिस जारी किए, लेकिन बाद में बिना किसी ठोस कार्यवाही या अंतिम निर्णय के पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रशासन की इसी ढुलमुल नीति के कारण आज भू-माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
ज्ञापन में हिंदू युवा वाहिनी और नगरवासियों ने मांग की है कि :-
सैल सागर तालाब की भूमि से सभी अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए और बुलडोजर की कार्यवाही की जाए ।
बंधान पर स्थित प्राचीन मंदिरों को असामाजिक तत्वों के चंगुल से मुक्त कराया जाए , कब्जाधारियों पर अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाए ।
सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले भू-माफियाओं पर कठोर कानूनी मुकदमा दर्ज हो और जेल की कार्यवाही ।
*कार्यवाही ना होने पर , हो सकता है बबाल*
ज्ञापन के अंत में हिंदू युवा वाहिनी ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील और जनहित के मुद्दे पर शीघ्र ही कोई ठोस एवं दंडात्मक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं की गई, तो संगठन नगरवासियों , सभी सामाजिक , संस्कृतिक , राजनैतिक व्यक्तियों और संगठनों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होगा और किसी भी हद तक जाने के लिए मजबूर होगा , जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी । साथ ही इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाकर जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।
जिले की जनता अब देखना चाहती है कि संगठन की शिकायत और शहर की अस्मिता के प्रतीक तलाब पर , अतिक्रमण की इस गंभीर शिकायत के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है, या भू-माफियाओं के आगे बेबस नजर आता है।
ज्ञापन देने वालों में अनुराग शर्मा , सोनू सेन , बसंत तिवारी , प्रमोद रैकवार , प्रीति खरे , सौरभ खरे, जितेंद्र सेन , राहुल , राजू दुबे , रिंकू , निर्वेश , बबलू रजक , अमित गोस्वामी सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।।
इनका कहना है :-
अतिक्रमणकारियों द्वारा राजशाही और वर्तमान में शासकीय तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा कर, नियमविरुद्ध विक्रय करना , और शासन - प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण में सहयोग करते हुए बिजली , पानी , रोड , नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना , यह कृत्य भारतीय दण्ड विधान, भू-राजस्व संहिता और लोक परिसर अधिनियम के तहत एक संगीन और दण्डनीय अपराध है।
"तालाबों का संरक्षण केवल एक सांस्कृतिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक , विधिक और संवैधानिक अनिवार्यता भी है। प्रशासन की चुप्पी और अंदरूनी सहयोग भू-माफियाओं को शह दे रही है।"
अनुराग शर्मा
हिंदू युवा वाहिनी
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