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ज्ञानवीर विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री ने परखी भविष्य के वकीलों की तैयारी, मूक कोर्ट का किया अवलोकन

सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर प्रवास के दौरान ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया, जिसमें विशेष रूप से विधि (Law) के छात्र-छात्राओं के लिए तैयार की गई मूक कोर्ट (Moot Court) आकर्षण का केंद्र रही।

*क्या है मूक कोर्ट?*

मूक कोर्ट एक प्रकार की कृत्रिम या नकली न्यायिक कार्यवाही होती है। इसमें कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र एक काल्पनिक कानूनी मामले पर वास्तविक अदालत की तरह बहस करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वास्तविक अदालती कार्यवाही और प्रोटोकॉल की बारीकियां सिखाना, न्यायिक तर्क  और पैरवी की कला में निपुण बनाना, मुकदमेबाजी और कानूनी दस्तावेजीकरण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

*मुख्यमंत्री ने बढ़ाया छात्र-छात्राओं का उत्साह*

मुख्यमंत्री ने मूक कोर्ट का अवलोकन करते हुए वहां मौजूद छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव ही एक कुशल अधिवक्ता और न्यायविद तैयार करने में सहायक होता है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा पद्धति में ऐसी सिम्युलेटेड लर्निंग (प्रायोगिक शिक्षण) को उपयोगी बताया। विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, मूक कोर्ट के माध्यम से छात्र अपनी झिझक दूर कर सकेंगे और भविष्य में उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।


*मुख्यमंत्री ने लिया बुंदेली स्वाद का आनंद, बोले- बुंदेली व्यंजन स्वादिष्ट भी और पाचक भी*

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुंदेलखंड के पारंपरिक खान-पान संस्कृति की सराहना करते हुए इसे सेहत के लिए भी उत्तम बताया है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बुंदेलखंड के पारंपरिक मोटे अनाज (Millets) से बने व्यंजनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्वार, बाजरा, मक्का की रोटी न केवल ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि हमारी प्राचीन आहार पद्धति का गौरव भी है।

*थाली में परोसा गया बुंदेलखंड का वैभव*

मुख्यमंत्री की थाली में बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इनमें मुख्य रूप से मेथी और चने की भाजी, कड़ी पकौड़ा, दही बड़े, पारंपरिक स्वाद के साथ बिजोरे, कचरिया, बरी की सब्जी और प्रसिद्ध महेरी, खीचला, पापड़, मंगोड़ी और गुजराती नमकीन, चिरौंजी की बर्फी, आम-नींबू का अचार और ताजगी से भरपूर आम का पना शामिल थे। उन्होंने कहा कि बुंदेली व्यंजन केवल स्वाद में ही बेमिसाल नहीं हैं, बल्कि यह पाचन की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। ज्वार-बाजरा जैसे मोटे अनाज स्वास्थ्य का आधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना वोकल फॉर लोकल के संकल्प को मजबूत करता है। बुंदेलखंड के ये व्यंजन इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मेहमाननवाजी का प्रतीक हैं।

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